क्या पूर्वोत्तर भारत का यह सत्य झुठलाया जा सकता है ?

पूर्वोत्तर भारत में अब चर्च के निशाने पर सेना, राज्य व केंद्र सरकारें- राष्ट्र द्रोह की मूक समर्थक व पोषक   

उल्फा, एन.एस.सी.एन. (आईएम), माओवादी तथा आईएसआई- पूर्वोत्तर भारत में तबाही मचाने की, इन चारों ने समन्वित योजना बना रखी है।–जगदम्बा मल्ल

1) नागालैण्ड, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, असम और अरुणाचल प्रदेश में आतंकवादियों-अलगाववादियों के द्वारा जारी हिंसा के कारण सामान्य जनता का जीना दूभर हो गया है।
2) पूर्वोत्तर भारत में चारों ओर हत्या, जबरन धन वसूली, अपहरण, शराब तथा अन्य मादक पदार्थों सहित हथियारों की तस्करी आदि अपराधों का बोलबाला है। इन सभी कुकृत्यों के पीछे अलगाववादियों-आतंकवादियों, ईसाई मिशनरियों, शत्रु देशों द्वारा प्रायोजित गैरसरकारी संगठनों, कथित मानवाधिकारवादी संगठनों और आई.एस.आई का हाथ है।
3) उल्फा, एनएससीएन (आईएम) तथा अन्य आतंकवादी संगठनों के साथ केन्द्र सरकार का जो संघर्ष विराम समझौता हुआ है, उसमें किए गये प्रावधानॉ के कारण राज्य पुलिस को अपनी सुरक्षा में भी गोली चलाने का अधिकार नहीं है। इन आतंकवादियों को जो लोग अपने घरों में शरण देते हैं, उनको भी सजा देने का कोई नियम-कानून नहीं है।
4) ईसाई मिशनरियों द्वारा अवैध शस्त्र व्यापार, देह व्यापार, लड़के-लड़कियों को नौकरी के नाम पर बेचने की घटनाएं तथा मादक पदार्थों की तस्करी की घटनाएं नागा समाज को उद्वेलित कर रही हैं।
5) गत 9 मार्च को एक बहुचर्चित पादरी ए पुनी को असम रायफल्स के जवानों ने उसके घर से अवैध हथियारों के साथ धर दबोचा। यह पादरी एनएससीएन (आईएम) का एक पदाधिकारी है तथा उसका रेड कार्ड नं 003 है। इसके घर से एके 56 रायफलें तथा अन्य घातक हथियार बरामद हुए हैं।
6) एनएससीएन (आईएम) का प्रमुख मुइवा कथित रूप से नागालैण्ड की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है। नागा मिशनरियां शांति प्रचारक बनकर अशांति और घृणा फैला रही हैं। नागालैण्ड की सरकार सरकारी खजाने की लूट में व्यस्त है और केन्द्र सरकार अपने विरोधाभासों में ही उलझी हुई है।
7) दो दशक पूर्व तक अरुणाचल प्रदेश में ईसाइयों का नामोनिशान तक नहीं था। तब वहां चारों तरफ शांति थी। ईसाई मिशनरियों के प्रवेश करते ही अरुणाचल ड्रेगन फोर्स (एडीएफ), नेशनल ड्रेगन फोर्स (एनडीएफ) तथा ताई-सिंग्फो सेक्यूरिटी फोर्स (टीएसएसएफ) नामक आतंकवादी संगठन बन गये। एनएससीएन (आईएम) के हेब्रान स्थित शिविर में उनको प्रशिक्षित किया गया।
8) माओवादी/नक्सलवादी, आईएसआई तथा उल्फा भी यहां सक्रिय हैं और यहां की शांतिप्रिय जनता का खून चूस रहे हैं। धन बसूली, अपहरण, मतान्तरण, हत्या तथा देह-व्यापार के लिए लड़कियों की कालाबाजारी यहां बेरोकटोक चल रही है। ।
9) अरुणाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री नाबाम टकी निशी जाति के कट्टर ईसाई हैं, दोनों कैथोलिक बिशपों, नागा आतंकवादियों, नागा ईसाई मिशनरियों तथा विदेश-पोषित गैरसरकारी संगठनों ने सोनिया गांधी की मदद से नाबाम को मुख्यमंत्री पद पर आसीन करने में सफलता पा ली है। इस कारण यहां चर्च को खुला मैदान मिल गया है। अरुणाचल में मतांतरण व आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए देश-विदेश से सैकड़ों करोड़ रुपए आ रहे हैं और चर्च इस काम में लगा हुआ है। जो इनका विरोध करता है उसकी हत्या हो जाती है अथवा उसका कुछ पता ही नहीं चलता।
10) मणिपुर का दर्द- संपूर्ण उत्तर पूर्वांचल में मणिपुर के हालात सबसे अधिक खराब हैं। गुप्तचर एजेंसियों का मानना है कि प्रतिवर्ष 20 से 30 किलो हेरोइन म्यांमार से मणिपुर आती है।
11) चीन में शरण लेने वाले उल्फा, एनएससीएन (आईएम) यूएनएलएफ, पीएलए तथा अन्य आतंकवादी संगठनों के प्रमुख नेता मणिपुर के चूराचांदपुर, चन्देल, उखरूल, सेनापति व तमेंडलांड जिलों में पोस्ता उत्पादन के लिए धन उपलब्ध कर रहे हैं। हेरोइन बनाने वाले कई कारखानों का संचालन कर रहे हैं।
12) यहां एनएससीएन (आईएम), यूएनएलएफ, पीएलए, यूएनसी तथा चर्च का गठबंधन बन गया है। आईएसआई भी इन सबकी सहायता कर रहा है। सभी ग्रामों में चर्च बनाए जा रहे हैं, मदरसों व मस्जिदों का विस्तार होता जा रहा है और माओवादी इकाइयों का गोपनीय गठन होता जा रहा है।
13) यदि केन्द्र सरकार ने 42,000 जवानों को मणिपुर में तैनात नहीं किया होता, तो वहां 28 जनवरी को विधानसभा चुनाव इन आतंकवादियों के उत्पात के कारण नहीं हो पाते। फिर भी वहां सैकड़ों लोग मारे गये। सेना भी उनको बचा नहीं पायी, क्योंकि सेना के हाथ बंधे थे, उन्हें खुली छूट नहीं दी गई थी। मणिपुर की पीड़ित व निर्दोष जनता इन सबके विरुद्ध आवाज उठाना चाहती है, किन्तु हिंसा के डर से उसकी आवाज बन्द है।
14) असम के हालात- असम में उल्फा (परेश गुट) का आतंक जारी है। 7 अप्रैल को नेशनल रिफाइनरी लिमिटेड लि. (गुवाहाटी) में उल्फा ने अपने स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आग लगा दी, करोड़ों की क्षति हुई। उल्फा, एन.एस.सी.एन. (आईएम), माओवादी तथा आईएसआई- इन चारों ने समन्वित योजना बनाकर असम में तबाही मचाने की ठान रखी है। कल्पना करें यदि सेना वहां न होती तो स्थिति कैसी होती ?
15) मेघालय- समय-समय पर मेघालय में भी आतंकवाद सर उठाता रहता है। इस समय गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी (जीएनएलए) तथा आचिक नेशनल वालेंटियर काउंसिल का उत्पात अपनी चरम सीमा पर है। ये दोनों ही चर्च प्रायोजित आतंकवादी संगठन हैं जिनका उल्फा, एनएससीएन (आईएम) तथा माओवादियों से गठबंधन है। धन उगाही के लिए अपहरण की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं।
16) पूर्वोत्तर में अन्तरराष्ट्रीय षड्यंत्र- 30 किमी. चौड़े सिलीगुड़ी गलियारे (चिकन नेक) को काटकर पूरे उत्तर पूर्वांचल को शेष भारत से अलग कर देने की योजना बनाकर अमरीका, ब्रिटेन, कोरिया, चीन, पाकिस्तान व बंगलादेश काम कर रहे हैं।
17) जहां बंगलादेश अपनी मुस्लिम आबादी यहां घुसा रहा है वहीं पाकिस्तान की आईएसआई यहां सक्रिय है। चीन ने सभी आतंकवादी प्रमुखों को निर्देशित किया है कि वे इन्डो-बर्मा रिवाल्यूशनरी फ्रण्ट (आईबीआरएफ) बनाकर संगठित हो जाएं और अपनी मारक क्षमता 30,000 प्रशिक्षित कैडर तक ले जाएं। ऐसा हो जाने पर चीन भारत पर आक्रमण कर देगा।
18) इस क्षेत्र में माओवादी बढ़ते जा रहे हैं। चर्च भी ईसाईयों की संख्या मतान्तरण के माध्यम से बढ़ाता जा रहा है। इसीलिए चीन पूरे उत्तर पूर्वांचल को निगल जाने की तैयारी में लगा हुआ है।
19) भारतीय सेना एक तरफ चीन की सेना से अन्तरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती है तो दूसरी तरफ इन आतंकवादियों तथा अपराधी तत्वों से समाज की रक्षा करती है। ये आतंकवादी केवल सेना से डरते हैं। सेना ही उनको नियंत्रित कर पाती है
 इसलिए सशस्त्र सैन्य बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) के नाम पर सेना को बदनाम करने की मुहिम चल पड़ी है।

20) सेना की सक्रियता एवं कर्तव्यनिष्ठा के कारण एनएससीएनई (आईएम), उल्फा, यूएनएलएफ तथा पीएलए के सभी शीर्ष नेता या तो जेल की हवा खा रहे हैं या फिर केन्द्र सरकार से शांति वार्ता कर रहे हैं। ऐसा करने के लिए वे बाध्य हैं, वरना या तो पकड़े जाएंगे या फिर मारे जाएंगे। इसलिए चर्च, चर्च-पोषित गैरसरकारी संगठन, विदेश पोषित गैरसरकारी संगठन, छद्म मानवाधिकारवादी संगठन तथा कुछ पत्रकार सशस्त्र सैन्य बल विशेषाधिकार अधिनियम (अफस्पा) को हटाने की मांग कर रहे हैं। वास्तव में जो लोग आतंकवादियों का मुखौटा बनकर सेना को बदनाम करने तथा उसे कमजोर करने की मुहिम चला रहे हैं, उनके धन के स्रोतों तथा उनके अन्तरराष्ट्रीय संबंधों की जांच कराने की आवश्यकता है। सैन्य बल विशेषाधिकार अधिनियम को हटाना अथवा उसमें संशोधन करना राष्ट्र के लिए घातक होगा और पूर्वोत्तर भारत के लिए तो प्राणघातक  

राष्ट्र के इन शत्रुओं को पहचान व सत्ता से हटा कर ही राष्ट्र सशक्त व सुरक्षित हो सकता है

- तिलक संपादक युग दर्पण मिडिया समूह — 

यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था,

आज भी इसमें वह गुण,

योग्यता व क्षमता विद्यमान है!

आओ मिलकर इसे बनायें- तिलक

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प्रेस निमंत्रण विश्व हिन्दू परिषद

VINOD BANSAL M – 98109 49109
(MEDIA CHIEF), VISHWA HINDU PARISHAD, DELHI ivhpmedia@gmail.com

प्रेस निमंत्रण

मई 19, 2012. विश्व हिन्दू परिषद दिल्ली द्वारा हिन्दुओं के ओबीसी कोटे में से मुसलमानों को आरक्षण तथा सच्चर कमेटी तथा रंग नाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग को लेकर हिन्दू सर्व जाति महा पंचायत का आयोजन रविवार (20-05-12) को सुबह 9-30 से 12-30 बजे तक तालकटोरा इन्डोर स्टेडियम नई दिल्ली-01 में किया गया है।

इसे विहिप के अन्तर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डा प्रवीण भाई तोगडिया तथा डा सुब्रह्मण्यम् स्वामी सहित कई वक्ता सम्बोधित करेंगे।

क्रपया इसे अपने “आज के कार्यक्रम” शीर्षक में छापने तथा रिपोर्टर/प्रतिनिधि व छाया कार/केमरा मेन को भेज कार्यक्रम को कवर कराने की क्रपा करें।

भवदीय

विनोद बंसल
मीडिया प्रमुख, विश्व हिन्दू परिषद – दिल्ली
संपर्क: मो – 9810949109 अणु डाक: ivhpmedia@gmail.com

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सोशल इन्जीनियरिग वाडा (5 साल में 10 हजार करोड का) ————

मायावती सरकार द्वारा खुद को पाक साफ बताने के लिए 24 महत्वपूर्ण विभागों के काम काज पर श्वेत पत्र जारी करने के अगले ही दिन भारतीय जनता पार्टी ने मायावती और बसपा के महामंत्री सतीश चन्द्र मिश्र के परिजनो पर फर्जी कम्पनियां बनाकर 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप लगाया है और अपने आरोप की पुष्टि में दस्तावेज भी जारी किये है।
पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं भ्रष्टाचार उजागर समिति के अध्यक्ष डा. किरीट सोमैया ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि मायावती के भाई आनंद कुमार और सतीश चन्द्र मिश्र के 20 वर्षीय पुत्र कपिल कुमार ने मिलकर घोटाले के पैसे छिपाने के लिए दर्जनों कम्पनियां बनायी। सोमैया ने अपने आरोपो की पुष्टि में आनंद कुमार समूह की 125 कम्पनियों की सूची और दस्तावेज जारी करते हुए आरोप लगाया कि इस तरह की बेनामी और रहस्यमय कम्पनियों की संख्या 300 से उपर है, जिनके माध्यम 10 हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया गया है। भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री मायावती को उनके द्वारा जारी दस्तावेज को गलत प्रमाणित करने की चुनौती देते हुए बताया कि पार्टी द्वारा इन घोटालो का पर्दाफाश किये जाने के बाद सतीश मिश्र ने बीती 30 नवम्बर को गुपचुप से अपने सभी परिजनो को इन कम्पनियों से अलग कर लिया।. सोमैया ने 7 ऐसी कम्पनियों के नाम की भी सूची जारी की जिसमें सतीश चन्द्र मिश्र के पुत्र कपिल कुमार और परिवार की महिला सदस्य कल्पना, श्यामली, सुभाषिनी, रुपश्री और भाग्यश्री निदेशक, शेयर धारक और मालिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कम्पनियों के शेयर आनंद कुमार एवं मिश्र के परिजनों को 10 -10 रुपये में हजारो और लाखों की संख्या में आवंटित किये गये, जिन्हें दो कम्पनियों के प्रति शेयर 400 रुपये के भाव से बेचे गये और भौतिक सत्यापन में पाया गया कि जिन कम्पनियों को वे शेयर बेचे गये वे फर्जी है और उनका कही अता पता नही है। यह बताते हुए कि आनंद कुमार समूह में कपिल सतीश मिश्र के अलावा डा. सुखदेव कुमार, दीपक बंसल, यादव सिंह एवं अन्य शामिल है, सोमैया ने कहा कि भाजपा ने इस संबंध में कम्पनी मामलो के मंत्रालय, इंफोर्समेंट ब्यूरो और सेंट्रल बोर्ड आफ डायरेक्ट टैक्सेस में आधिकारिक रूप में लिखित शिकायत अंकित करायी। सोमैया ने अपने आरोप की पुष्टि में लैसर फाइनेंशल एण्ड प्रोजेक्ट्स कन्सलटंट प्राइवेट लि. नाम की कम्पनी का उल्लेख करते हुए बताया कि यह कम्पनी 1952 में कुछ अज्ञात लोगो ने बनायी थी और लम्बे समय तक इन कम्पनियों ने पैसे का कोई लेन देन नही किया।

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आज का सत्य व धर्म युद्ध !

हमारी आकांक्षा रहती है

वही पाने की,
जिसे पाना सरल नहीं होता;
क्योंकि, जो सहज सुलभ होता है
वह विनीत होता है !
किन्तु, हम उधर हाथ बढ़ाते हैं,
जिसे पाना सरल हो,
फिर चाहे वो गरल हो,
क्योंकि, जो विनीत होता है,
वह आकांक्षा नहीं जगाता !
विनय को कौन सुनता है ?
शक्ति की सदा पूजा होती है,
चाहे वो शक्ति सत्ता की हो,
भुज बल, धन बल अथवा
वह शक्ति हो जन बल की !
जब सत्ता निरंकुश हो जाये,
उसका हर कार्य अधर्म कहलाता है,
तथा उस पर अंकुश धर्म !
सत्ता उस अंकुश को माने तो धर्म सत्ता,
न माने तो ?
धर्म व न्याय की रक्षा में होता है,
धर्म युद्ध !!

- तिलक, संपादक युग दर्पण 9911111611
देश की मिटटी की सुगंध, भारतचौपाल!

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DESH KE CHAUKIDAR, देशका चौकीदार कहे- देश भक्तो, जागते रहो- संपादक युगदर्पण

 

देशका चौकीदार

DESH KE CHAUKIDAR, देशका चौकीदार कहे- देश भक्तो, जागते रहो- संपादक युगदर्पण

 कृपया, एक बार सोचें अवश्य / क्या आपने कभी सोचा है ? 

यदि आप 31 दिस. की रात के हंगामे से जुड़ने जा रहे हैं,  कृपया, एक बार सोचें अवश्य / बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना तो सुना था किन्तु बिना कारण का हंगामा व् बर्बादी क्यों ? जिसे नया वर्ष बताया जा रहा है, वह मात्र एक कैलेंडर का बदलना ही तो है ! उस कैलेंडर के बदलने से हमारे जीवन का क्या बदल रहा है ? कुछ नहीं, न ही उसका हमारे इतिहास या संस्कृति के किसी महत्वपूर्ण दिवस से कोई सम्बन्ध है, न सृष्टि की रचना से ! जिसको ईस्वी संवत कहते हैं उसका ईसा के जनम से भी कोई सम्बन्ध नहीं, वो भी 25 दिस. को है ! तो फिर 31 की रात हंगामा किस बात का ? केवल सर्दियों में होटल क्लब अपनी मंदी मिटाने व सूरा सुंदरी की बिक्री के लिए गढ़ा गया, अंग्रेजी भाषा, व अंग्रेजी नया वर्ष वास्तव में अंग्रेजी दासत्व तोलने का एक तराजू है ! जब तक यह चलेगा उनको दीखता रहेगा की सत्ता हस्तांतरण के बाद भी हमारे दास अपनी दास मानसिकता से चिपटे है ! 

अंग्रेजी भाषा, व अंग्रेजी नया वर्ष को त्यागकर ही तो हम दूसरी आज़ादी का शंख नाद कर सकते हैं ! तो आओ हम सब इनका परित्याग करने का प्राण करें !
 तिलक संपादक युगदर्पण राष्ट्रीय साप्ताहिक हिंदी समाचार-पत्र. 09911111611. पत्रकारिता व्यवसाय नहीं एक मिशन है-युगदर्पण 
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देश का चौकीदार ….

अग्निपथ का विजय हूँ मैं, और ग़दर का हूँ तारा,
चौकीदार हूँ भारत का, हर देश भक्त को हूँ प्यारा;

भारत से जो प्रेम करे, जान उसपर मेरी निसार,
जो भारत का शत्रु है, कहता हूँ उनको, ख़बरदार,
गद्दारों का संरक्षण हो, या कानून की कमजोरी,
किसके बल पर अकड़ रहे झेलोगे क्या मेरा वार,
अग्निपथ का विजय हूँ मैं, और ग़दर का हूँ तारा,
चौकीदार हूँ भारत का, हर देश भक्त को हूँ प्यारा;

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गूगल-भारत का अपनी सामग्री नीति पर स्पष्टीकरण (हिंदी अनुवाद)

बस, क्योंकि यह सामग्री विवादास्पद है, इससे नहीं हटायेंगे :गूगल (साभार प्रस्तुति)
नई दिल्ली: ऑनलाइन सामग्री विनियमन पर उग्र विवाद के बीच, इंटरनेट खोज अग्रणी गूगल भारत ने मंगलवार को कहा कि वह देश के कानून के अनुपालन के साथ है, किन्तु किसी भी सामग्री को बस इससे नहीं हटायेंगे क्योंकि यह सामग्री विवादास्पद है :गूगल ।
“कानून के पालन के साथ ही उपयोगी जानकारी लोगों तक पहुचना यथासंभव सुनिश्चित करने हेतु वास्तव में हम कठिन काम करने में विश्वास करते है। इसका अर्थ यह है कि जब सामग्री गैरकानूनी है, हम स्थानीय कानून का पालन करते है और इसे हटा देते हैं ।..”
यहां तक कि जहां सामग्री कानूनी है किन्तु हमारे स्वयं के नियम और शर्तों का उल्लंघन करती है या तोड़ती है; एक बार हमें इसके बारे में अधिसूचित किया गया है, हम उसे भी हटा देते हैं,” गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा ।
“किन्तु जब सामग्री कानूनी है और हमारी नीतियों का उल्लंघन नहीं होता, हम केवल इसलिए नहीं हटाते है कि यह विवादास्पद है। हम मानते हैं कि लोगों के विचार भिन्न होकर यदि वे कानूनी सही हैं, संरक्षित और सम्मान किया जाना चाहिए” प्रवक्ता ने कहा ।
केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने आज गूगल और फेसबुक जैसे सामाजिक वेबसाइटों से सुनिश्चित करने को कहा कि अपमानजनक ऑनलाइन सामग्री के अपलोड बंद कर दिया है। कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार तो हस्तक्षेप नहीं चाहती है किन्तु यदि सामाजिक नेटवर्किंग साइट सहयोग करने को तैयार नहीं हैं, “तो आवश्यक कदम के बारे में सोचना यह सरकार का कर्तव्य है ।” सरकार ने गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, फेसबुक और याहू के अधिकारियों से मुलाकात की, विशेष रूप से पिछले कुछ सप्ताह से इंटरनेट पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विरुद्ध आक्रामक सामग्री के बाद ।
अग्रणी खोज इंजन याहू ने मंत्री के विचारों पर टिप्पणी करने से मना कर दिया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट के अधिकारी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे।
‘सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक’, देश में जिसके 25 लाख से अधिक उपयोगकर्ता है, ने कहा है कि यह धमकी देने, घृणा, हिंसा व नग्नता फ़ैलाने वाली किसी भी सामग्री को निकाल है उस की सेवा बंद कर देंगे, ऐसा उनकी शर्तों में भी दिया है।
“अपमानजनक सामग्री ऑनलाइन उपलब्धता न्यूनतम करने में सरकारी रूचि हम स्वीकारते है और भारतीय अधिकारियों के साथ इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस के रूप में सरकार से चर्चा जारी रखेंगे” फेसबुक ने एक बयान में कहा। बयान में आगे कहा: “हम फेसबुक एक ऐसी जगह है जहां लोग दूसरों की भावनाओं और अधिकार को सम्मान देते हुए, मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से चर्चा चाहते हैं, कर सकते हैं । इसलिए हमारी साइट पर पहले से ही नीतियों में जगह और लोगों को अपमानजनक सामग्री रिपोर्ट करने के लिए सक्षम सुविधाएं है।”
सिब्बल ने कहा है ‘साइटों में से कुछ पोस्ट पर सामग्री इतना आक्रामक थी कि यह देश में समुदायों के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंचाती होगी । ‘
नोट: पाठक इसे पढ़ कर बताएं, सरकार व मंत्री जी का चरित्र, इतिहास और उपरोक्त से आपको क्या लगता है ? :
मंत्री की चिंता का कारण किसी की धार्मिक भावनाओं को चोट है अथवा इंटरनेट पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के विरुद्ध आक्रामक सामग्री ।
धार्मिक भावनाओं की चिंता के पर्दे के पीछे की राजनैतिक चिंता की ओर देश के शीर्ष मिडिया ने देखने व दिखने का प्रयास किया ?
आइये आप और हम मिलकर इसे सब तक पहुंचाएं । साथ ही सब मिलकर सरकार की (बदनीयती)चाल फेसबुक को समझाएं ।
हम सच को छुपाते नहीं, छुपाये जा रहे सच को प्रकाश में लाते हैं -संपादक युग दर्पण ।

http://satyadarpan.blogspot.com/2011/12/blog-post.html

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